Thursday, 17 September 2015

अच्छे विचार, जरूर पढ़े.......................

परायी स्त्री और पराया धन जिसके मन को अपवित्र नहीं करते, गंगादि तीर्थ उसके चरण-स्पर्श करने की अभिलाषा करते हैं और उसका पूरा सम्मान करते हैं।
:-एकनाथ

ग़रीब वह हैं जिसकी अभिलाषा बढ़ी हुई हैं। सुखी और प्रसन्न वह व्यक्ति ही हैं जो कम इच्छाये रखता हैं।
:- डेनियल

फल की अभिलाषा छोड़कर कर्म करने वाला मनुष्य ही मोक्ष प्राप्त करता हैं। कर्म ही जीवन का सार हैं। कर्म करने वाला व्यक्ति ही सफलता को प्राप्त करता हैं।
:- श्रीमद्भगवतगीता पुराण

अभिलाषाओं से ऊपर उठ जाओं वे पूरी हो जायेगी, मांगोगे तो उनकी पूर्ति तुमसे और दूर जा पड़ेगी। इसलिए अपनी अभिलाषाओं पर अंकुश रखना सीखों।
:- रामतीर्थ


आईये हम अपने आज का बलिदान कर दें ताकि हमारे बच्चों का कल बेहतर हो सकें।
:- अब्दुल कलाम

हर असफलता के साथ मेरी प्रतिष्ठा बढ़ जाती हैं।
:- जॉर्ज बनॉर्ड शॉ

जो सभी का मित्र होता हैं वह किसी का भी मित्र नहीं होता हैं।
:- अरस्तु

सुनहरा युग हमारे सामने है न की हमारे पीछे।
:- विलियम शेक्सपियर

मै वहां से शुरू करता हूँ जहां से आखिरी व्यक्ति ने छोड़ा था।
:- थॉमस एलवा एडिसन

मनुष्य को अपनी ओर खीचने
वाला यदि जगत में कोई असली चुम्बक है, तो वह
केवल प्रेम है |
:-महात्मा गाँधी

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