काम की बातें:-
नमस्कार मित्रों! शुभ प्रातः
"क्या आप सभी ऐसा ही सोंचते हैं....?"
दरअसल आज मैंने ये ब्लॉग एक अतिमहत्वपूर्ण मुद्दे पर बनाया हैं।
मेरा आपसे प्रश्न है की क्या आप मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, विद्युत बल्ब आदि एलेक्ट्रोनिक आइटम्स को आप सामान्य समझते हैं, अर्थात क्या आप बस ऐसा ही समझते है?
"क्या आप सभी ऐसा ही सोंचते हैं....?"
दरअसल आज मैंने ये ब्लॉग एक अतिमहत्वपूर्ण मुद्दे पर बनाया हैं।
मेरा आपसे प्रश्न है की क्या आप मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, विद्युत बल्ब आदि एलेक्ट्रोनिक आइटम्स को आप सामान्य समझते हैं, अर्थात क्या आप बस ऐसा ही समझते है?
तो आपका उत्तर हैं हाँ! यानी आप इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बस उपयोग करें जा रहे हैं और वो भी सामान्य समझकर?
चलिए अब हम आपको बताते है की इन सामान्य से दिखने वाले उपकरणों की हक़ीक़त क्या है वास्तविकता क्या है।
दरअसल मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी और विद्युत बल्ब आदि एलेक्ट्रोनिक आइटम्स जिन्हें आप रोजमर्रा के कार्यों में उपयोग करते है ये सभी रेडियेशन पैदा करने वाली चीज़े हैं।
चलिए अब हम आपको बताते है की इन सामान्य से दिखने वाले उपकरणों की हक़ीक़त क्या है वास्तविकता क्या है।
दरअसल मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी और विद्युत बल्ब आदि एलेक्ट्रोनिक आइटम्स जिन्हें आप रोजमर्रा के कार्यों में उपयोग करते है ये सभी रेडियेशन पैदा करने वाली चीज़े हैं।
अब हम आपको बताते है की क्या होता है रेडीएशन?
रेडियेशन चुम्बकीय किरणों का एक ऐसा समूह हैं जिससे जीव-जंतुओं को कही न कही क्षति अवश्य पहुचती हैं। मानव भी जीवों की श्रेणी में आता है तो स्वभाविक सी बात है की उस पर भी असर कही न कही होगा ही होंगा।
रेडियेशन चुम्बकीय किरणों का एक ऐसा समूह हैं जिससे जीव-जंतुओं को कही न कही क्षति अवश्य पहुचती हैं। मानव भी जीवों की श्रेणी में आता है तो स्वभाविक सी बात है की उस पर भी असर कही न कही होगा ही होंगा।
रेडीएशन के दुष्प्रभाव:-
1) रेडियेशन के कारण गर्भवती महिलाओं को बहुत गहरा नुकसान पहुचता है जो की आने वाले बच्चे के लिए खतरनांक हो सकता हैं।
2) आज कैंसर ट्यूमर जैसी बीमारियां अपने पैर पसार रही है इसका मुख्य कारण ये ही रेडियेशन हैं।
3)बिना कारण अचानक सरदर्द होना।
रेडीयेशन के माध्यम:-
यह चुम्बकीय विकिरण मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, विद्युत बल्ब आदि एलेक्ट्रोनिक आइटम्स से फैलता ही है। बिजली के बल्ब से भी रेडियेशन फैलता हैं। जी हाँ यह सच हैं। रात में अचानक तेज़ रौशनी का बल्ब न जलाएं।
ज्यादा टीवी या कम्प्यूटर का उपयोग न करे यदि टीवी का उपयोग ज्यादा करना है तो कम से कम 10 फ़ीट का अंतर अवश्य बनाए।
याद रखे रेडियेशन का असर हमें अक्सर उपकरणो की समीपता के कारण की होता हैं।
ठीक इसी प्रकार 24 घंटे आपकी पॉकेट या जेब में रहने वाले मोबाइल से भी बहुत रेडियेशन निकलता हैं।
अंतर्राष्ट्रीय एवं भारतीय मानक के अनुसार मोबाइल फोन का रेडिएशन लेवल 1.6 वाट/किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। परंतु मोबाइल कंपनिया रेडियेशन को ध्यान में न रखकर प्रतिस्पर्धा के दौर में आगे निकलने के लिए ज्यादा रेडियेशन देने वाले मोबाइल प्रोडक्ट बाज़ार में ला रही हैं।
हम आपकों बता दे की आप अपने मोबाइल का रेडियेशन स्तर जांच सकते हैं। उसके लिए आपको अपने मोबाइल में एक नम्बर डायल करना होगा। और फिर आपके सामने वाट प्रति किग्रा में रेडियेशन प्रदर्शित हो जाएगा।
तो आप रेडियशन स्तर को जांचने के लिए *#07# नम्बर डायल कर सकते हैं।
1) रेडियेशन के कारण गर्भवती महिलाओं को बहुत गहरा नुकसान पहुचता है जो की आने वाले बच्चे के लिए खतरनांक हो सकता हैं।
2) आज कैंसर ट्यूमर जैसी बीमारियां अपने पैर पसार रही है इसका मुख्य कारण ये ही रेडियेशन हैं।
3)बिना कारण अचानक सरदर्द होना।
रेडीयेशन के माध्यम:-
यह चुम्बकीय विकिरण मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, विद्युत बल्ब आदि एलेक्ट्रोनिक आइटम्स से फैलता ही है। बिजली के बल्ब से भी रेडियेशन फैलता हैं। जी हाँ यह सच हैं। रात में अचानक तेज़ रौशनी का बल्ब न जलाएं।
ज्यादा टीवी या कम्प्यूटर का उपयोग न करे यदि टीवी का उपयोग ज्यादा करना है तो कम से कम 10 फ़ीट का अंतर अवश्य बनाए।
याद रखे रेडियेशन का असर हमें अक्सर उपकरणो की समीपता के कारण की होता हैं।
ठीक इसी प्रकार 24 घंटे आपकी पॉकेट या जेब में रहने वाले मोबाइल से भी बहुत रेडियेशन निकलता हैं।
अंतर्राष्ट्रीय एवं भारतीय मानक के अनुसार मोबाइल फोन का रेडिएशन लेवल 1.6 वाट/किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। परंतु मोबाइल कंपनिया रेडियेशन को ध्यान में न रखकर प्रतिस्पर्धा के दौर में आगे निकलने के लिए ज्यादा रेडियेशन देने वाले मोबाइल प्रोडक्ट बाज़ार में ला रही हैं।
हम आपकों बता दे की आप अपने मोबाइल का रेडियेशन स्तर जांच सकते हैं। उसके लिए आपको अपने मोबाइल में एक नम्बर डायल करना होगा। और फिर आपके सामने वाट प्रति किग्रा में रेडियेशन प्रदर्शित हो जाएगा।
तो आप रेडियशन स्तर को जांचने के लिए *#07# नम्बर डायल कर सकते हैं।
बस आप मोबाइल का उपयोग करते वक़्त बस इतना याद रखिये:-
1) आपके मोबाइल का रेडियेशन लेवल 1.6 वाट/किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए।
2) आप अपना मोबाइल फुल चार्ज रखे इससे रेडियेशन कम होंगा। चार्जिंग कम होने से रेडियेशन लेवल ज्यादा हो जाता हैं।
3) नेटवर्क कम होने से भी रेडियेशन लेवल ज्यादा हो जाता हैं।
4) कार, बसों में या जहाँ आसपास धातुओं की शेट्स या चादरें लगी हो वहां मोबाइल का उपयोग कॉल करने के लिए न करें। वहां पर भी रेडियेशन लेवल ज्यादा हो जाता हैं।
रेडियेशन की पहचान:-
मोबाइल पर बात करते वक़्त यदि ज्यादा समय आप रेडियेशन के संपर्क में रहते हैं तो आपको अपने कान के पास और मोबाइल की बॉडी पर गर्मी महसूस होने लगती हैं।
रेडियेशन से बचाव:-
1)हमेशा कोशिश करे की आपका मोबाईल आपके 90% समय में आपसे कम से कम 10 इंच की दूरी पर रहे और मोबाइल पर बात संक्षेप में करें साथ ही साथ बात करने के लिए वायर हेड सेट का प्रयोग करें ब्लूटूथ का नहीं।
2) सबसे बढ़िया उपाय एक यह भी है की आप रात में सोने से 1 घंटे पहले और खाना के बाद गुनगुने दूध में हल्दी डालकर पिये। याद रहे हल्दी को उबालना नहीं हैं। बस दूध को गरम करो और उतरने से बस पहले ही हल्दी दाल दों। फिर प्राकृतिक रूप से स्वतः ठंडा होने दे और गुनगुना पी जाये। इस नुस्खे से आप रेडिएशन और कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों के प्रभाव में कभी नहीं आयेगे। वैसे भी हल्दी प्रतिजैविक या एंटीबायोटिक होती हैं। जो आपके शरीर को अंदर से मजबूत तथा रक्त का शोधन तथा चेहरे पर लालिमा का निर्माण करती हैं।
1) आपके मोबाइल का रेडियेशन लेवल 1.6 वाट/किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए।
2) आप अपना मोबाइल फुल चार्ज रखे इससे रेडियेशन कम होंगा। चार्जिंग कम होने से रेडियेशन लेवल ज्यादा हो जाता हैं।
3) नेटवर्क कम होने से भी रेडियेशन लेवल ज्यादा हो जाता हैं।
4) कार, बसों में या जहाँ आसपास धातुओं की शेट्स या चादरें लगी हो वहां मोबाइल का उपयोग कॉल करने के लिए न करें। वहां पर भी रेडियेशन लेवल ज्यादा हो जाता हैं।
रेडियेशन की पहचान:-
मोबाइल पर बात करते वक़्त यदि ज्यादा समय आप रेडियेशन के संपर्क में रहते हैं तो आपको अपने कान के पास और मोबाइल की बॉडी पर गर्मी महसूस होने लगती हैं।
रेडियेशन से बचाव:-
1)हमेशा कोशिश करे की आपका मोबाईल आपके 90% समय में आपसे कम से कम 10 इंच की दूरी पर रहे और मोबाइल पर बात संक्षेप में करें साथ ही साथ बात करने के लिए वायर हेड सेट का प्रयोग करें ब्लूटूथ का नहीं।
2) सबसे बढ़िया उपाय एक यह भी है की आप रात में सोने से 1 घंटे पहले और खाना के बाद गुनगुने दूध में हल्दी डालकर पिये। याद रहे हल्दी को उबालना नहीं हैं। बस दूध को गरम करो और उतरने से बस पहले ही हल्दी दाल दों। फिर प्राकृतिक रूप से स्वतः ठंडा होने दे और गुनगुना पी जाये। इस नुस्खे से आप रेडिएशन और कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों के प्रभाव में कभी नहीं आयेगे। वैसे भी हल्दी प्रतिजैविक या एंटीबायोटिक होती हैं। जो आपके शरीर को अंदर से मजबूत तथा रक्त का शोधन तथा चेहरे पर लालिमा का निर्माण करती हैं।
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