देशभक्ति कविता
तेरी मिटटी को मेरा शत-शत है नमन,
है मातृभूमि तुझे भारत का अभिनन्दन||
न जाने कितने एहसान है तेरे|
न जाने कितने एहसान है तेरे,
है मातृभूमि तुझे भारत का अभिनन्दन||
तेरी धरा में माँ, खून है मिला
कही है राणा का तो कही सुभास का
उस खून को मेरा, शत् शत् है नमन
है मातृभूमि तुझे भारत का अभिनन्दन||
सबसे पहले फांसी चढ़ने मंगल आया
सन् सत्तावन की क्रांति का दिया जलाया
उस क्रांति को मेरा शत्-शत् है नमन
है मातृभूमि तुझे भारत का अभिनन्दन||
झाँसी की रानी माँ वो तो महिला थी
मर्दों जैसी माँ वो लड़ने वाली थी
झांसी रानी को मेरा शत्-शत् है नमन
तेरी मिटटी को मेरा शत्-शत् है नमन
है मातृभूमि तुझे भारत का अभिनन्दन||
तेरे तुलसी ने माँ एसा रंग जमाया
राम के दोहे की माला लेकर आया
उसके राम को मेरा शत् शत् है नमन
है मातृभूमि तुझे भारत का अभिनन्दन||
स्वतंत्रता का झंडा लेकर अशफांक आया
साथ में दिल-ए-बिस्मिल लेकर आया
अशफांक बिस्मिल को मेरा शत्-शत् है नमन
है मातृभूमि तुझे भारत का अभिनन्दन||
उस दिल से लिखी है ये कविता मैंने माँ
जिस दिल से भगत सिंह फाँसी चढ़ा था
भगत की फांसी को मेरा शत्-शत् है नमन
है मातृभूमि तुझे भारत का अभिनन्दन||
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Monday, 7 March 2016
तेरी मिटटी को शत शत नमन
Thursday, 28 January 2016
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