"नव काया प्रदाय हल्दी, रोग-शोक भगाय हल्दी"
इसे हरिद्रा और turmaric के नाम से भी जाना जाता हैं।
हल्दी का महत्त्व:-
1. यह जीवाणुरोधी है और यह एक प्राकृतिक एंटिसेप्टिक एवं एंटिबैक्टेरियल एजेन्ट है। हल्दी के लेप को किसी भी जले हुए या चोट लगे हुए अंग पर लगाने से संक्रमण नहीं होता या होना कम हो जाता है।2. हल्दी के सेवन से यदि कैंसर हो तो उसका बढ़ना रुक जाता है।
3.दूध में हल्दी और शहद एक साथ मिलाकर पीने से शरीर में बलपुष्ठि होती हैं।
4.मुंह में छाले होने पर हल्दी और शहद लगाएं या वैसे केवल हल्दी भी लगायी जा सकती हैं।
5. हल्दी का दरदरा चूर्ण और दूध की मलाई को मिलाकर लगाये व प्राकृतिक रूप से सूखने दे। फिर धो लें। इससे चेहरा और त्वचा दोनों चमक उठेगे।
6.लिवर के मरीजो को अवश्य हल्दी की मात्र ग्रहण करना चाहियें।
7. रोज़ाना थोड़ी-थोड़ी हल्दी खाएं इससे भूख बढेंगी।
8. हल्दी या उसकी पत्तियों का रस या हल्दी गाँठ जो भी उपलब्ध हो उसके रस या चूर्ण को उबटन के जैसे प्रयोग करने से तवचा में कांति आने लगती हैं। यह रक्त शोधक और बहुत ही असरदार हैं इसलिए यह चरम रोगों को ठीक करने में लाभकारी हैं।
9. हल्दी त्वचा का रूप निखारने के लिए इसका प्रयोग करते है।
10. हल्दी से मेलानोमा यानी काले तिल उभरना रुक सकता है।
11. मानव लीवर के लिए यह एक बहुत ही बढ़िया प्राकृतिक शोधक हैं।
12. इसकी तासीर गरम होती हैं इसलिए दमा के मरीजों को दूध में हल्दी को मिलाकर सुबह और शाम देना चाहिए।
13.मोच के उपचार में भी इसका उपयोग किया जाता हैं।
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